Monday, September 15, 2008

रहीम के दोहे:जिसने हृदय में स्थान बना लिया उससे सुख दु:ख क्या कहना

जेहि रहीम तन मन लियो, कियों हिए बिच भीन
तासों दुख सुख कहन की, रही बात अब कौन


कवि रहीम का कथन है कि जिस व्यक्ति ने तन मन पर अधिकार कर लिया है, उसने हृदय में स्थान बना लिया है, ऐसे प्रेमी से दुख, सुख कहने की अब कौन सी बात शेष रह गयी।

निज कर क्रिया रहीम कहीं, सुधि भावी के हाथ
पाँसे अपने हाथ में, दांव न अपने हाथ

कवि रहीम कहते हैं कि अपने हाथ में तो कर्म करना है परिणाम भविष्य के गर्भ में है जैसे जुआरी के हाथ में खेल के पाँसे कौडी तो अपने हाथ में होते हैं, परन्तु दाव अपने वश में नहीं होता।
वर्तमान संदर्भ में व्याख्या-यह सच भी है कि जिससे हम हृदय से प्रेम करते हैं उससे सुख दुःख की क्या कहना? वह तो स्वयं ही सब पढ़ सकता है। फिर उसके पास होने से सुख दुःख का विचार ही कहां आता है। जिससे प्रेम है वह पास होता है तो सुख की अनुभूति होती है उसका वर्णन उसके सामने करने से क्या लाभ? जब वह दूर होता है तो दुःख की अनुभूति होती है पर अगर हम उस तक अपनी यह भावना पहुंचायेंगे तो वह वह दुःखी होगा। समय के अनुसार मिलना बिछड़ना तो होता ही है।

जीवन में कर्म करना अपने हाथ में है पर परिणाम के लिये कुछ कहना कठिन है। हम कोई कार्य शुरू करते हैं तो उससे अनेक तरह के फल की आशायें करते हैं पर वह प्राप्त न होने पर निराशा घेर लेती है। सच तो यह है परमात्मा ने कर्म करने के लिये हाथ दिये हैं पर उनसे अपना भाग्य नहीं लिखा जाता। वह तो सब समयानुसार प्राप्त होता है। इसलिये अपने हाथों से हमेशा ही अच्छे कर्म करने के लिये तत्पर रहना चाहिये और परिणाम की आशा परमात्मा की इच्छा पर ही छोड़ देना चाहिये।

-----------------------------------
यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग‘दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका’ पर लिखा गया है। अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द लेख पत्रिका
2.शब्दलेख सारथि
3.दीपक भारतदीप का चिंतन
संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप

2 comments:

seema gupta said...

जेहि रहीम तन मन लियो, कियों हिए बिच भीन
तासों दुख सुख कहन की, रही बात अब कौन
" bhut sach or shukhad"

Regards

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

सचमुच, महापुरुषों के विचार देश-काल से परे होते हैं.

समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढ़ें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका


इस लेखक की लोकप्रिय पत्रिकायें

आप इस ब्लॉग की कापी नहीं कर सकते

Text selection Lock by Hindi Blog Tips

हिंदी मित्र पत्रिका

यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं। लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर

विशिष्ट पत्रिकायें

Blog Archive

stat counter

Labels