Saturday, June 27, 2009

मनुस्मृति-शरीर को पवित्र एवं शुद्ध रखने के प्रयास जरूरी

वसाशुक्रमसृंमज्जामूत्रविंघ्राणकर्णविट्।
श्नेष्माश्रुदूषिकास्वेदा द्वादशैते नृणां मलाः।।
हिंदी में भावार्थ-
मनुष्य की देह में बारह प्रकार का मल होता है-1.चर्बी, 2.वीर्य, 3.रक्त, 4.मज्जा, 5.मूत्र, 6.विष्ठा, 7.आंखों का कीचड़, 8.नाक की गंदगी, 9.कान का मैल, 10. आंसू, 11.कफ तथा 12. त्वचा से निकलने वाला पसीना।
कृत्वा मूत्रं पूरीषं वा खन्याचान्त उपस्मृशेत्।
वेदमश्येघ्यमाणश्च अन्नमश्नंश्च सर्वदा।।
हिंदी में भावार्थ-
मल मूत्र त्याग करने के बाद हमेशा हाथ धोकर आचमन करना के साथ ही दो बार मूंह भी धोना चाहिये। सदैव वेद पढ़ने तथा भोजन करने से पहले भी आचमन करना चाहिये।
एका लिंगे गुदे त्रिस्त्रस्तथैकत्र करे दश।
उभयोः सप्त दातव्याः मृदः शुद्धिमभीप्सता।।
हिंदी में भावार्थ-
जो लोग पूर्ण रूप से देह की शुद्धता चाहते हैं उनके लघुशंका पर लिंग पर एक बार मल त्याग करने पर गुदा पर तीन बार तथा बायें हाथ पर दस बार एवं दोनों हाथों की हथेलियों और उसके पृष्ठ भाग पर सात बार मिट्टी (वर्तमान में साबुन भी कह सकते हैं) लगाकर जल से धोना चाहिये।
वर्तमान संदर्भ में संपादकीय व्याख्या-दरअसल जब शरीर की पवित्रता और अपवित्रता की बात कही जाती है तो आधुनिक ढंग से सोचने वाले उसे एक तरह से अंध विश्वास मानते हैं जबकि पश्चिम के वैज्ञानिक भी अब मानने लगे हैं कि शरीर को साफ रखने से उसे अस्वस्थ करने वाले अनेक प्रकार के सूक्ष्म कीटाणु दूर हो जाते हैं। जल न केवल जीवन है बल्कि औषधि भी है। यही बात वायु के संबंध में कही जाती है। प्रातः प्राणायम करने से आक्सीजन अधिक मात्रा में शरीर को प्राप्त होता है जिससे कि अनेक रोग स्वतः ही परे रहते हैं। वैसे अगर हम विचार करें तो देह अस्वस्थ हो और इलाज के लिये चिकित्सकों के घर जाकर नंबर लगायें उससे अच्छा तो यह है कि जल और वायु से अपने शरीर को स्वस्थ रखें।
भारतीय अध्यात्म के आलोचक आधुनिक विज्ञान की चकाचैंध में इस बात को भूल जाते हैं कि बीमारी के इलाज से अच्छा तो स्वस्थ रहने के लिये प्रयास करने की बात तो पश्चिमी वैज्ञानिक भी मानते हैं।
--------------------------
यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग ‘शब्दलेख सारथी’ पर लिखा गया है। मेरे अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.अनंत शब्द योग
संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप

1 comment:

Anil said...

इतने पुराने समय में भी सफाई की इतनी महत्ता थी, लेकिन आज अधिकांश व्यक्ति बिना हाथ धोये खाना खाते हैं, जिसे "फास्ट फ़ूड" भी कहा जाता है. स्वयं महात्मा गाँधी ने भी कहा था "सफाई में ही भगवन का निवास है". एक दिन में पांच बार हाथ धोने के नियम को शायद ही कोई भारतीय अपनाता हो.

समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढ़ें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका


इस लेखक की लोकप्रिय पत्रिकायें

आप इस ब्लॉग की कापी नहीं कर सकते

Text selection Lock by Hindi Blog Tips

हिंदी मित्र पत्रिका

यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं। लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर

विशिष्ट पत्रिकायें

Blog Archive

stat counter

Labels