Friday, January 11, 2008

दीपक भारतदीप का मूल्यांकन करने वाले अपनी काबलियत बताएं

दिलचस्प बात यह है कल से मैंने जो पोस्ट डालीं हैं उनमें जो विवाद हैं उसे लोग पढ़ खूब रहे हैं पर कमेन्ट कोई नहीं दे रहा है. मतलब लोग रट्टा कौन मोल ले यही सोचकर चुप हैं-चौपालों पर डर का माहौल बनाकर रखा है.. अगर मेरी जगह कोई और होता तो उसकी तो हालात पतली कर देते पर मुझे देखकर उनकी आवाज बंद है, वैसे भी डरना क्या? कौन वह इसे पढ़ रहे हैं, पढ़ते होते तो मेरा सबसे हल्का ब्लॉग ले जाते. मालुम है कि इसके ब्लॉग सब भारी-भरकम हैं नहीं झेल पायेंगे. ले जाना भी जरूरी है आख़िर भारत का सबसे तेज ब्लोगर है पुरस्कार में वजन कहाँ से आयेगा?

मेरे इस सवाल का जवाब कोई नहीं दे रहा कि चाहे वह मेरा हल्का ब्लॉग था पर तुम्हें पता है उसमें गणेश जी पर एक पोस्ट है और उसे तुमने पढा? तुम्हें मेरा कोई ब्लॉग शामिल करना ही नहीं था. उसमें धर्म-कर्म से संबधित बहुत सामग्री है. तुम में अपने लिखने के अहंकार के साथ इसमें तमाम तरह के ग़लत फायदे उठाने का भाव है और दिखते किसी भी धर्म के हो पर उसका कोई सम्मान नहीं है. नहीं तो बताते तो क्यों नहीं कि तुम्हारी काबलियत क्या है कि तुम दीपक भारतदीप का मूल्यांकन करोगे? अब तुम मुश्किल में हो. चुपचाप एक पोस्ट डालकर माफ़ी मांग लो नहीं तो झेलते रहो. रोज तो तुम पर लिखूंगा नहीं पर चाहे जब आयेगा तुम पर लिख कर नए ब्लोगरों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास करूंगा जिसे तुमने गिराने की कोशिश की हैं और मैं यह होने नहीं दूँगा. तुम यह तो बताओं कि क्या लिखते हों जो मेरे लिखे का मूल्यांकन करोगे. चाहे जिसे और जैसे पुरस्कार दो पर मेरा नाम क्यों जोडा. मुझसे पूछा. क्या तुमने ब्लॉग बना लिया तो क्या समझ लिया कि सब ब्लॉग तुम्हारी जागीर हो गए और उनका मूल्यांकन करोगे और पोस्ट पर छापोगे. मैं जानता हू कि ऐसे पुरस्कार कैसे दिए जाते हैं. इतने सारे पुरस्कार के लिए आवेदन मांगे जाते हैं पर मैं कभी नहीं करता, और तुम मेरा ब्लॉग मुझसे लिए बगैर उसका मूल्यांकन करने लगे. यार अपनी काबलियत बताओ कि आख़िर भारत के सबसे तेज ब्लोगर का मूल्यांकन कैसे किया ?

2 comments:

yes said...

अब अपना ये गाना बंद भी करो भाई. गलती हुई हम सबसे, हिन्दी से, सारे ब्लाग जगत से. तुम तो भगवान हो भगवान से भी एक बालिश्त ऊंचे हो. सबसे तेज हो, सबसे तेज चैनल से भी ज्यादा तेज हो, तेजेस्ट हो.

इतना तो राखी सांवत भी नहीं रोई थी.
जीतने वालों को मुबारकबाद दो.

परमजीत बाली said...

दीपक जी,आप के लेखन के बारे में हम जानते हैं।आप बहुत ज्यादा और बहुत अच्छा लिखते हैं।आप परेशान ना हो,चिट्ठों का सही मुल्यांकन तो पाठक ही करते हैं।आप जानते हैं हरेक अपनी योग्यता व ज्ञान के आधार पर ही निर्णय लेता है।इस में भूलचूक हो जाना स्वाभाविक है।वैसे भी १४०० चिट्ठों मे से किसी एक को चुनना आसान काम नही होता।आप जानते हैं "प्रत्यक्ष को प्रमाण की अवश्यकता नही होती।"अत: आप इसे नजर अंदाज कर दें।

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