किसी काम करने की सोचना और अपनी वाणी से उसे करने का दावा करना अत्यंत सहज है पर उसका निष्पादन करना तभी संभव है जब अपने सामर्थ्य के अनुरूप हो। आजकल फिल्म, टीवी तथा पत्र पत्रिकाओं में विज्ञापनों का ऐसा प्रभाव है कि लोग उसमें बहक जाते हैं। तमाम तरह के ऐसे ख्वाब देखते हैं जिनका पूरा कर सकना उनकी सामाजिक, आर्थिक तथा व्यक्तिगत स्तर की सीमित क्षमता के कारण संभव नहीं हो सकता। इतना ही नहीं अनेक बार अपने सामर्थ्य से बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने पर लोग अपने सारे आर्थिक संसाधन और शारीरिक ऊर्जा बर्बाद कर देते हैं पर उनके हाथ कुछ नहीं आता जिसकी वजह से उनको भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है।
कौटिल्य का अर्थशास्त्र में कहा गया है कि
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शक्याशक्यपद्धिविछेदं कुर्याद्बुद्धया प्रसन्नया।
केवलं दन्तभङ्गायदन्तिनः शैलताडनम्।।
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शक्याशक्यपद्धिविछेदं कुर्याद्बुद्धया प्रसन्नया।
केवलं दन्तभङ्गायदन्तिनः शैलताडनम्।।
‘‘अपनी शुद्ध बुद्धि के तय करें कि कौनसा कार्य करना अपनी शक्ति के अनसार है या नहंी। इस तरह का विचार किये बिना कोई काम करना ऐसा ही है जैसे कि हाथी पर्वत पर प्रहार कर अपने केवल दांत ही तोड़ता है।’’
अशक्यारम्भवृत्तीनां कुतः क्लेशादृते फलम्।
भविन्त परितापिन्यो व्यक्तं कर्मविपतयः।।
भविन्त परितापिन्यो व्यक्तं कर्मविपतयः।।
‘‘अपनी शक्ति या सामर्थ्य से बाहर कार्य करने पर सिवाय क्लेश के कुछ हाथ नहीं आता। अपने कर्म से बुलाई गई आपत्ति व्यक्ति के लिये अत्यंत दुःखदायी होती है।’’
फिल्म, टीवी और समाचार पत्रों में विज्ञापनों के माध्यम से जिस आधुनिक संसार को आम जनमानस के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है वह केवल धन की शक्ति से बना है। जिनके पास धन है उनकी शक्ति का प्रचार इस तरह किया जा रहा है कि लोग उनकी भक्ति करने लगते हैं। किसी धनपति की संपदा के उद्गम स्त्रोत पवित्र हैं या नहीं इसकी जानकारी कभी नहीं मिलती। यही कारण है कि समाज में अपराध के प्रति युवाओं का आकर्षण बढ़ रहा है। बुरे काम का बुरा नतीजा जब सामने आता है तब लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ती है। लोग आत्ममंथन नहीं करते। बस जैसा बाहर देखते हैं वैसा ही अंदर होने की इच्छा पालते हैं। अगर हम आजकल व्याप्त तनाव का अध्ययन करें तो यही सोच उसके लिये जिम्मेदार दिखाई देती है।
---------------संकलक, लेखक और संपादक-दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’,ग्वालियर
athor and editor-Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep",Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com
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यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग‘दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका’ पर लिखा गया है। अन्य ब्लाग
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